Followers

Friday, April 18, 2014

बूँद

ज़िंदगी के दरख्त की शाख पे
ठहरी हुई बूँद की मानिंद हो तुम
जिसे बरसना अभी बाकी है .......


मुहम्मद शाहिद मंसूरी  "अजनबी"
10th June. 2008, '249'

No comments:

Post a Comment