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Saturday, April 12, 2014

वो सुकूं शाम न दे सकी

वो सुकूं शाम न दे सकी 
वो सुकूं सहर न दे सका
वो सुकूं मस्जिद में मिला 

वो सुकूं उनकी यादों से न मिला 
वो सुकूं गुजरी मुलाकातों से न मिला 
वो सुकूं मस्जिद में मिला 

वो सुकूं गुलमोहर तले न मिला
वो सुकूं पलाश के पास न मिला 
वो सुकूं मस्जिद में मिला 

वो सुकूं ज़िन्दगी की रानाई में न मिला 
वो सुकूं प्यार की परछाईं में न मिला 
वो सुकूं मस्जिद में मिला 

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'
20th July .03, '173'

 

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