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Friday, April 18, 2014

मुझे टूटने दो

मत पुकारे कोई मुझे
नहीं सुनना चाहता
मैं किसी की आवाज़
मुझे धुंध में ही रहने दो
मुझे खुद में गुम रहने दो
नहीं जुरुरत मुझे किसी कंधे की
मैं टूटता हूँ
मुझे टूटने दो।

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
12nd Feb. 2010 '252'

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