Followers

Wednesday, April 16, 2014

यूँ टूट के उसने मुहब्बत की है

यूँ टूट के उसने मुहब्बत की है 
अपने घर को जला के रौशनी की है 

शामो-सहर जलता है यादों का चिराग 
आज शम्मा ने खूब रौशनी की है 

क्या कहूँ  उसके आईने के लिए 
सरे तस्वीर जला के दिल रौशनी की है 

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'
21st Aug. 2000, '232'

No comments:

Post a Comment