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Tuesday, April 22, 2014

सुना है तुम नज्में लिखते हो

सुना है तुम नज्में लिखते हो
सुना है तुम ग़ज़लें कहते हो
सुना है तुम कविता करते हो
सुना है तुम रुबाईयाँ सुनते हो
मुसव्विर हो नहीं
मगर मुसव्विर सा दिल रखते हो

- मुह्म्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'
29th Nov. 12

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