Followers

Wednesday, April 23, 2014

खुशियों की ज़मीं

खुशियों की ज़मीं 
खुशियों का आसमां
खुशियों का हो गुलशन 
खुशियों की हों दीवारें 

और इस प्यारे घर में 
खनके तेरी हंसी 
और रहें हम दोनों 
तमाम उम्र नहीं 
ताउम्र तक 
रोज़ी और शाहिद !!!

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'
29 Mar. 2008, '268'

No comments:

Post a Comment