जब से प्यार हुआ है तुमसे
नहीं लगता दिल, दुनिया से
भूल गया मैं ये दुनिया
भूल गया मैं ये जहां
मेरी दुनिया बस तुम हो
मेरा जहाँ बस तुम हो
मेरी हर तमन्ना तुम हो
मेरी हर ख़ुशी तुम हो
जब से प्यार हुआ तुमसे
नहीं लगता दिल बहारों से
मेरी हर बहार तुम हो
मेरा हर चमन तुम हो
कली का खिलना तुम हो
फूलों का मुस्कुराना तुम हो
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
18th Apr. 2000, '76'
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Wednesday, September 14, 2011
Monday, September 12, 2011
शायद तुम में नहीं..
है मुझमें वो जूनून तुम्हें पाने का
है मुझमें वो पागलपन तुम्हें पाने का
शायद तुम में नहीं..
है वो लगन तुमसे मिलने की
है वो आरज़ू तुम्हें देखने की
शायद तुम में नहीं ..
है पता वो आहट तुम्हारे आने की
है पता वो तरीका तुम्हारे जाने का
शायद तुम में नहीं..
है दर्द मेरे सीने में
है रुकावटमेरे जीने में
शायद तुम में नहीं..
है वो अहसास तुम्हारी चाहत का
है वो सावन तुम्हारे प्यार का
शायद तुम में नहीं..
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
15th Apr. 2000 '75'
Friday, September 09, 2011
हवाओं से मेरा पता पूछते हैं
वो रोते हैं मेरे लिए
मैं रोता हूँ उनके लिए
वो जीते हैं मेरे लिए
मैं मरता हूँ उनके लिए
दोनों बने हैं बस प्यार के लिए
खाईं हैं उसने कसमें
किये हैं हमने वादे
साथ निभाने के लिए
आँखों ही आँखों में मुझे बुला के
फिर खुद दूर चले जाते हैं
मेरी बेक़रारी बढाने के लिए
छत पर तन्हा बैठ कर
चाँद को निहारते हैं
हवाओं से मेरा पता पूछते हैं
मुझे देखने के लिए
दुनिया से दूर होकर
तन्हाईयों में बैठते हैं और
सन्नाटों से प्यार करते हैं
मुझे सोचने के लिए
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'74' 18th Apr. 2000
Sunday, September 04, 2011
कब झूमेंगी खुशियाँ तुम पर
कब होंगी दूर ग़म की घटायें
कब छटेंगे जुदाई के बादल
कब गिरेंगे फूल हम पर
कब झूमेंगी खुशियाँ तुम पर
बाँहों में होंगे तुम तुम्हारे
दिल में होंगे हम तुम्हारे
ऐसा भी शमन आएगा
बस इंतज़ार कराएगा
इंतज़ार करें और कब तक
पहुंचा दो पयाम ये उन तक
नहीं सही जाती अब ये जुदाई
नहीं सहा जाता अब ये दर्द
कह दो उनसे ऐ "अजनबी"
यही है मेरे प्यार का दर्द
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'73' 12nd Apr. 2000
कब छटेंगे जुदाई के बादल
कब गिरेंगे फूल हम पर
कब झूमेंगी खुशियाँ तुम पर
बाँहों में होंगे तुम तुम्हारे
दिल में होंगे हम तुम्हारे
ऐसा भी शमन आएगा
बस इंतज़ार कराएगा
इंतज़ार करें और कब तक
पहुंचा दो पयाम ये उन तक
नहीं सही जाती अब ये जुदाई
नहीं सहा जाता अब ये दर्द
कह दो उनसे ऐ "अजनबी"
यही है मेरे प्यार का दर्द
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'73' 12nd Apr. 2000
अश्कों को न बहाया करो
इस तरह मुझे देखकर न तुम मुस्कुराया करो
लाख मजबूरियां सही बस तुम आ जाया करो
यूँ तो कटने को कट जाएगी ये ज़िन्दगी
लेकिन इतना मुझे न तुम सताया करो
सोचता हूँ रहूँ हर दम तेरी बाँहों में
अरे इस पागल को कभी तो समझाया करो
बहुत कीमती है तुम्हारी आँखों का पानी
इस तरह इन अश्कों को न बहाया करो
अपनी ज़िन्दगी को ऐ "अजनबी"
इतना मत रुलाया करो - रुलाया करो
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'72' 3rd May, 2000
Friday, September 02, 2011
अक्सर तन्हाईयों में
प्यार करके आदमी
चैने दिल के बदले
दर्दे दिल ले लेता है
याद जब आती है अपने यार की
अपने ही अश्कों में वो
उसका अक्स ढूँढ लेता है
जुस्तुजू में उसकी
चाँद पर पहुँचता है
ऐसे लम्हात को वो
अपने दिल में क़ैद कर लेता है
अक्सर तन्हाईयों में
कभी रोता है वो
कभी हँसता है
यादों से ही उसकी
अपने दिल को बहला लेता है
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'71' 17th Feb. 2000
चैने दिल के बदले
दर्दे दिल ले लेता है
याद जब आती है अपने यार की
अपने ही अश्कों में वो
उसका अक्स ढूँढ लेता है
जुस्तुजू में उसकी
चाँद पर पहुँचता है
ऐसे लम्हात को वो
अपने दिल में क़ैद कर लेता है
अक्सर तन्हाईयों में
कभी रोता है वो
कभी हँसता है
यादों से ही उसकी
अपने दिल को बहला लेता है
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'71' 17th Feb. 2000
Thursday, September 01, 2011
इस दिल में है दर्द इतना
इस दिल में है दर्द इतना
छुपाये से छुपता नहीं
लाख अश्कों को समेंटें हैं हम
मगर रोके से रुकते नहीं
भर गया है अब दर्द का प्याला
अब और उसमें दर्द समाता नहीं
आ जाओ, बस आ जाओ अब तुम
इंतज़ार के लिए अब और ये थमता नहीं
चाहत के दर्द में है अब "अजनबी"
जब तक की तुम नहीं - तुम नहीं
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी
'70' 11st Feb. 2000
छुपाये से छुपता नहीं
लाख अश्कों को समेंटें हैं हम
मगर रोके से रुकते नहीं
भर गया है अब दर्द का प्याला
अब और उसमें दर्द समाता नहीं
आ जाओ, बस आ जाओ अब तुम
इंतज़ार के लिए अब और ये थमता नहीं
चाहत के दर्द में है अब "अजनबी"
जब तक की तुम नहीं - तुम नहीं
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी
'70' 11st Feb. 2000
Monday, August 29, 2011
रिश्तों को हम निभाएंगे
रिश्तों को हम निभाएंगे, रस्मों को हम निभाएंगे
मगर तुमसे बिछड़कर जिंदा न हम रह पाएंगे
हर किसी से अपने को जुदा कर लेंगे
मगर अपने को तुमसे अलग न कर पाएंगे
सिखाई है तूने मुझे सिर्फ वफ़ा
अब तुझसे बे वफाई न कर पाएंगे
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'69' 16th Feb. 2000
मगर तुमसे बिछड़कर जिंदा न हम रह पाएंगे
हर किसी से अपने को जुदा कर लेंगे
मगर अपने को तुमसे अलग न कर पाएंगे
सिखाई है तूने मुझे सिर्फ वफ़ा
अब तुझसे बे वफाई न कर पाएंगे
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'69' 16th Feb. 2000
Sunday, August 28, 2011
वादा है सनम, तुम से है ये वादा
प्यार किया है प्यार करेंगे
तेरे हैं हम तेरे ही रहेंगे
वादा है सनम, तुम से है ये वादा
छोड़ेंगे ये दुनिया, न छोड़ेंगे तुम्हें सनम
दिल से बांधे रहेंगे सारी ज़िन्दगी तुम्हें सनम
वादा है सनम, तुमसे है ये वादा
आने न देंगे ऐसे दिन न वे रातें
न कह पायें इक दुसरे से दिल की बातें
वादा है सनम, तुमसे है ये वादा
ग़मों को ले लूँगा तुम्हारे दे के अपनी खुशियाँ
छिपा लूँगा तुझे अपने में लुटा के अपनी हँसियाँ
वादा है सनम, तुमसे है ये वादा
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'68' 16th Feb., 2000
तेरे हैं हम तेरे ही रहेंगे
वादा है सनम, तुम से है ये वादा
छोड़ेंगे ये दुनिया, न छोड़ेंगे तुम्हें सनम
दिल से बांधे रहेंगे सारी ज़िन्दगी तुम्हें सनम
वादा है सनम, तुमसे है ये वादा
आने न देंगे ऐसे दिन न वे रातें
न कह पायें इक दुसरे से दिल की बातें
वादा है सनम, तुमसे है ये वादा
ग़मों को ले लूँगा तुम्हारे दे के अपनी खुशियाँ
छिपा लूँगा तुझे अपने में लुटा के अपनी हँसियाँ
वादा है सनम, तुमसे है ये वादा
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'68' 16th Feb., 2000
Saturday, August 27, 2011
वो तेरी मीठी बातें
हर पल सताती हैं
हर लम्हा रुलाती हैं
वो तेरी मीठी बातें
कभी नींदों से जगाती हैं
तो कभी बातों में हँसाती हैं
वो तेरी यादें - तेरी यादें
दिल में उठता है तूफ़ान
मन में होती है हलचल
जब ही याद आती है
तेरे संग गुजारी रातें
वो चाँद का चमकना
मेरा सर तेरी गोद में होना
अपने होठों से मेरे सर को
फिर तेरा वो चूमना
याद आती हैं जब ये यादें
भर जाती हैं तेरे प्यार से मेरी साँसें
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी'
'67' 16th Feb. 2000
हर लम्हा रुलाती हैं
वो तेरी मीठी बातें
कभी नींदों से जगाती हैं
तो कभी बातों में हँसाती हैं
वो तेरी यादें - तेरी यादें
दिल में उठता है तूफ़ान
मन में होती है हलचल
जब ही याद आती है
तेरे संग गुजारी रातें
वो चाँद का चमकना
मेरा सर तेरी गोद में होना
अपने होठों से मेरे सर को
फिर तेरा वो चूमना
याद आती हैं जब ये यादें
भर जाती हैं तेरे प्यार से मेरी साँसें
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी'
'67' 16th Feb. 2000
Thursday, August 25, 2011
किसी से तुझे प्यार हो गया
कहाँ गया वो भोलापन
कहाँ गयी वो सादगी
हो गया तू तो अब ज़िन्दगी से बेखबर
नहीं है तुझे तो अब अपनी खबर
किसी से तुझे प्यार हो गया
खो गए हो तुम अपने में
डूब गए हो तुम सपने में
बना ली है ख्वाबों की दुनिया
बना लिया है उसकी बातों का महल
किसी से तुझे प्यार हो गया
फूलों से करते हो बातें
बूंदों से करते हो प्यार
रहते हो अब तुम तन्हाईयों में
हो गए हो सारी दुनिया से "अजनबी"
और अपनों से अनजाने
किसी से तुझे प्यार हो गया
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'66' 3rd Jan, 2000
कहाँ गयी वो सादगी
हो गया तू तो अब ज़िन्दगी से बेखबर
नहीं है तुझे तो अब अपनी खबर
किसी से तुझे प्यार हो गया
खो गए हो तुम अपने में
डूब गए हो तुम सपने में
बना ली है ख्वाबों की दुनिया
बना लिया है उसकी बातों का महल
किसी से तुझे प्यार हो गया
फूलों से करते हो बातें
बूंदों से करते हो प्यार
रहते हो अब तुम तन्हाईयों में
हो गए हो सारी दुनिया से "अजनबी"
और अपनों से अनजाने
किसी से तुझे प्यार हो गया
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'66' 3rd Jan, 2000
Wednesday, August 24, 2011
दुनिया वालों की है ये दुनिया
बादल को बरसने दे
बिजली को चमकने दे
जो होता है उसे होने दे
ऐ, दुनिया वालो, लेकिन!
हमें उसी का हो के रहने दे
न करो हमें जुदा
न करो हमें अलग
गर हो गए जुदा
गर हो गए अलग
ये दिल तो रो रहा है
आसमान दुनिया वालों की
दुनिया वालों की है ये दुनिया
मेरी तो बस वही है दुनिया
वही है मेरी ज़िन्दगी
वही है दिल की धड़कन
दिल में हैं मेरे ढेर सारी तमन्नाएँ
कर दो पूरी मेरी तमन्नाएँ
रो रहे हैं हम उसके लिए
ले लो मेरा चैन चाहे
ले लो मेरी जान
ऐ दुनिया वालो, लेकिन !
हमें उसी का हो के रहने दे
कर रहा हिया फ़रियाद आज "अजनबी"
सुन लो दुनिया वालो सुनलो।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'65 ' 9th June, 2000
बिजली को चमकने दे
जो होता है उसे होने दे
ऐ, दुनिया वालो, लेकिन!
हमें उसी का हो के रहने दे
न करो हमें जुदा
न करो हमें अलग
गर हो गए जुदा
गर हो गए अलग
ये दिल तो रो रहा है
आसमान दुनिया वालों की
दुनिया वालों की है ये दुनिया
मेरी तो बस वही है दुनिया
वही है मेरी ज़िन्दगी
वही है दिल की धड़कन
दिल में हैं मेरे ढेर सारी तमन्नाएँ
कर दो पूरी मेरी तमन्नाएँ
रो रहे हैं हम उसके लिए
ले लो मेरा चैन चाहे
ले लो मेरी जान
ऐ दुनिया वालो, लेकिन !
हमें उसी का हो के रहने दे
कर रहा हिया फ़रियाद आज "अजनबी"
सुन लो दुनिया वालो सुनलो।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'65 ' 9th June, 2000
Tuesday, August 23, 2011
बहारों का शमां बिखेर दिया
मैं उजड़ा चमन था
तुमने मेरी ज़िन्दगी में आके
बहारों का शमां बिखेर दिया
ग़मों का साया ओढ़ लिया
ऐसे नहीं होगा प्यार मेरे यार
फिर कैसे होगा प्यार मेरे यार
मैं भी नहीं समझता
तू भी नहीं जानती
मैं मरूँगा तेरे लिए
तू जियेगी मेरे लिए
ऐसे ही होगा प्यार मेरे यार
बस इतना है-
मेरी ज़िन्दगी ग़मों का सागर थी
तुमने मेरी ज़िन्दगी में आके
मुहब्बत का सागर बना दिया
मैं अपने से "अजनबी" था
तुमने मुझे सच्चे यार से मिला दिया।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'64' 7th June 2000
तुमने मेरी ज़िन्दगी में आके
बहारों का शमां बिखेर दिया
ग़मों का साया ओढ़ लिया
ऐसे नहीं होगा प्यार मेरे यार
फिर कैसे होगा प्यार मेरे यार
मैं भी नहीं समझता
तू भी नहीं जानती
मैं मरूँगा तेरे लिए
तू जियेगी मेरे लिए
ऐसे ही होगा प्यार मेरे यार
बस इतना है-
मेरी ज़िन्दगी ग़मों का सागर थी
तुमने मेरी ज़िन्दगी में आके
मुहब्बत का सागर बना दिया
मैं अपने से "अजनबी" था
तुमने मुझे सच्चे यार से मिला दिया।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'64' 7th June 2000
ऐसे न थे सनम
हम तो ऐसे न थे सनम
तुमने मुझे ऐसा बनाया
दुनिया से किया अनजाना
देकर अपने प्यार का अफसाना
चाहते हो अब क्या लेना
जरा जल्दी से बताना
दे दिया है दर्दे दिल
ले लिया है चैने दिल
अब क्या दूँ मैं तुझे
ले लो , बस ले लो अब मुझे
न रहें अब हम "अजनबी"
हो जाएँ अब एक और बस एक !
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी"
'63' 9th June, 2000
तुमने मुझे ऐसा बनाया
दुनिया से किया अनजाना
देकर अपने प्यार का अफसाना
चाहते हो अब क्या लेना
जरा जल्दी से बताना
दे दिया है दर्दे दिल
ले लिया है चैने दिल
अब क्या दूँ मैं तुझे
ले लो , बस ले लो अब मुझे
न रहें अब हम "अजनबी"
हो जाएँ अब एक और बस एक !
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी"
'63' 9th June, 2000
Sunday, August 21, 2011
प्यार ही प्यार छलकता है उसकी बातों में
प्यार ही प्यार छलकता है उसकी बातों में
गजब का नशा है उसकी आँखों में
सोचता हूँ जब भी मैं तन्हा रातों में
नज़र आता है वो ही नशा अपनी आँखों में
जुस्तुजू है उसी की गुजरी मुलाकातों में
जो हर पल रहता है मेरी आँखों में
बस इक वही है मेरी दुआओं मेरी मिन्नतों में
जो ख्वाब बनकर सजा है मेरी आँखों में
हम भी देखेंगे उसका वो "अजनबी'
अरसे से बसा है जो उसकी आँखों में
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'61' 5th Jan. 2000
गजब का नशा है उसकी आँखों में
सोचता हूँ जब भी मैं तन्हा रातों में
नज़र आता है वो ही नशा अपनी आँखों में
जुस्तुजू है उसी की गुजरी मुलाकातों में
जो हर पल रहता है मेरी आँखों में
बस इक वही है मेरी दुआओं मेरी मिन्नतों में
जो ख्वाब बनकर सजा है मेरी आँखों में
हम भी देखेंगे उसका वो "अजनबी'
अरसे से बसा है जो उसकी आँखों में
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'61' 5th Jan. 2000
लो वादा किया मैंने
लो वादा किया मैंने
न रूठूंगा कभी तुमसे
मान भी जाओ मेरे यार
तुम्हीं तो हो मेरे प्यार
गर रूठूंगा मैं तुमसे
रूठ जायेंगे हम खुद से
छोडो ये गुस्सा बुस्सा
चेहरे पे लाओ हँसियाँ
आयें अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ
चलें फिर बागों में
खो जाएँ प्यार की बातों में
डूब जाएँ चाहत में
लो पकड़े अपने ये कान
यार मेरे अब तो मान
लो वादा किया मैंने
न रूठूंगा कभी तुमसे।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'62' 9th June 2000
न रूठूंगा कभी तुमसे
मान भी जाओ मेरे यार
तुम्हीं तो हो मेरे प्यार
गर रूठूंगा मैं तुमसे
रूठ जायेंगे हम खुद से
छोडो ये गुस्सा बुस्सा
चेहरे पे लाओ हँसियाँ
आयें अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ
चलें फिर बागों में
खो जाएँ प्यार की बातों में
डूब जाएँ चाहत में
लो पकड़े अपने ये कान
यार मेरे अब तो मान
लो वादा किया मैंने
न रूठूंगा कभी तुमसे।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'62' 9th June 2000
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