तुमने मुझे अपना समझा
और मैंने तुम्हें अपना जाना
इस तरन बन गया प्यार का अफसाना
तुम देना मेरा साथ
जब तक है
हम दोनों का हाथों में हाथ
न होना कभी तुम जुदा
न करे कभी ऐसा खुदा
क्योंकि
मैंने तुमसे प्यार किया है
और तूने हमसे प्यार किया है
तूने मेरी लूट के खुशियाँ
दे दिए हैं मुझको ग़म
अब मेरे पास
ग़म हैं ज्यादा और खुशियाँ हैं कम
न चलना तुम किसी और की राहों में
रहना हमेशा उसकी बाँहों में
जिससे तुमने प्यार किया है
अपना पहला इज़हार किया है
गर न दिया साथ तुमने तो
ग़म होंगे मेरे दोस्त
दुश्मन होंगी मेरी सारी खुशियाँ।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'30' 17th May, 1999
Followers
Sunday, May 22, 2011
Thursday, May 19, 2011
इस प्यार को न तुम मरने देना
इस प्यार को न तुम मरने देना
जो करना पड़े कर लेना
जो सहना पड़े सह लेना
अगर तू मेरी निशा है
तो मेरी सुबह भी तू ही है
गर ये प्यार न रहा
तो समझूंगा मैं
ये जहाँ न रहा
इस प्यार के लिए मैं
ज़िन्दगी लुटा सकता हूँ
अपने को मिटा सकता हूँ
ऐ मेरी ज़िन्दगी की सुबह
तुमसे यही है तमन्ना
यही है आरज़ू
कि
इस प्यार को न तुम मरने देना ।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'29' 31st May, 1999
जो करना पड़े कर लेना
जो सहना पड़े सह लेना
अगर तू मेरी निशा है
तो मेरी सुबह भी तू ही है
गर ये प्यार न रहा
तो समझूंगा मैं
ये जहाँ न रहा
इस प्यार के लिए मैं
ज़िन्दगी लुटा सकता हूँ
अपने को मिटा सकता हूँ
ऐ मेरी ज़िन्दगी की सुबह
तुमसे यही है तमन्ना
यही है आरज़ू
कि
इस प्यार को न तुम मरने देना ।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'29' 31st May, 1999
Thursday, May 12, 2011
खुशियों से दामन भरा रहे
तू हमेशा खुश रहे
मेरे पास रहे चाहे किसी
और के पास रहे
दूर-दूर रहें ग़म और
खुशियों से दामन भरा रहे
न आँखें तुम्हारी नम हों
न दिल में आये मलाल
बस खुश रहो तुम हर हाल
होठों पे हंसी रहे
चेहरे पे ख़ुशी रहे
मन तुम्हारा हमेशा
खिला-खिला रहे
बाहें तुम्हारी खुली- खुली रहें
बस ऐसे ही ज़िन्दगी तुम्हारी
कटती रहे- कटती रहे
क्योंकि
तुम्हें ऐसे देखकर
"अजनबी" भी खुश रहे।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'28' 16th May, 1999
मेरे पास रहे चाहे किसी
और के पास रहे
दूर-दूर रहें ग़म और
खुशियों से दामन भरा रहे
न आँखें तुम्हारी नम हों
न दिल में आये मलाल
बस खुश रहो तुम हर हाल
होठों पे हंसी रहे
चेहरे पे ख़ुशी रहे
मन तुम्हारा हमेशा
खिला-खिला रहे
बाहें तुम्हारी खुली- खुली रहें
बस ऐसे ही ज़िन्दगी तुम्हारी
कटती रहे- कटती रहे
क्योंकि
तुम्हें ऐसे देखकर
"अजनबी" भी खुश रहे।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'28' 16th May, 1999
Wednesday, May 11, 2011
मेरी सारी रुस्वाईयां
बाँहों में तुम्हें लेके करता हूँ महसूस
जैसे मुझे मिल गयी सारी दुनिया
दामन में मेरे आ गयीं सारी खुशियाँ
दूर, बहुत दूर हो गयीं
मुझसे मेरी सारी रुस्वाईयां
अब तो कहता है मन
कि
न टूटे ये बंधन दोस्ती का
बस यूँ ही जुड़ा रहे
ये रिश्ता ख़ुशी का
जिसे कहती है दुनिया
असर है ये आँखें होने का चार
पर मैंने नाम दिया है इसे प्यार
कैसे किया जाता है प्यार
होता है इसमें क्या?
नहीं जनता हूँ
पर
मालूम है इतना जरुर
जब भी याद आती है उसकी
तो देखता हूँ उसको चाँद में !!
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'27' 16th May, 1999
जैसे मुझे मिल गयी सारी दुनिया
दामन में मेरे आ गयीं सारी खुशियाँ
दूर, बहुत दूर हो गयीं
मुझसे मेरी सारी रुस्वाईयां
अब तो कहता है मन
कि
न टूटे ये बंधन दोस्ती का
बस यूँ ही जुड़ा रहे
ये रिश्ता ख़ुशी का
जिसे कहती है दुनिया
असर है ये आँखें होने का चार
पर मैंने नाम दिया है इसे प्यार
कैसे किया जाता है प्यार
होता है इसमें क्या?
नहीं जनता हूँ
पर
मालूम है इतना जरुर
जब भी याद आती है उसकी
तो देखता हूँ उसको चाँद में !!
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'27' 16th May, 1999
Tuesday, May 10, 2011
रात कटती है आँखों में
आजकल लगता नहीं है मेरा दिल आजकल
इन किताबों में
दुनिया के सारे नजारों में
अक्सर याद आती है उसी की
जो रहता है
हर पल ख्यालों में
बस गए हैं अब तो वो ही ख्वाबों में
कर दिया मुश्किल उसने तो
जीना इन दिनों में
दिन पहाड़ सा होता है और
रात कटती है आँखों में
कब मिलेंगे उससे जो
बैठा है पलकें बिछाए मेरे लिए
याद आ रही है उसकी तो
आज बातों- बातों में
अब तो न जाने कब होंगे
वो मेरी बाहों में
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'26' 14th May, 1999
इन किताबों में
दुनिया के सारे नजारों में
अक्सर याद आती है उसी की
जो रहता है
हर पल ख्यालों में
बस गए हैं अब तो वो ही ख्वाबों में
कर दिया मुश्किल उसने तो
जीना इन दिनों में
दिन पहाड़ सा होता है और
रात कटती है आँखों में
कब मिलेंगे उससे जो
बैठा है पलकें बिछाए मेरे लिए
याद आ रही है उसकी तो
आज बातों- बातों में
अब तो न जाने कब होंगे
वो मेरी बाहों में
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'26' 14th May, 1999
Monday, May 09, 2011
मेरे आसपास
जब भी मैंने तुम्हें लगाया सीने से
और भर लिया तुम्हें अपनी बाँहों में
तब-तब महसूस की मेरे दिल ने
इक खुशबू
शायद थी वो खुशबू तुम्हारे यौवन की
जिसमें मेरा मन डुबकियाँ ले रहा था
और मैं सराबोर हो रहा था
तुम्हारे सीने की छुवन भर से
मुझमे उठती थी इक सिहरन
तब
और भर लिया तुम्हें अपनी बाँहों में
तब-तब महसूस की मेरे दिल ने
इक खुशबू
शायद थी वो खुशबू तुम्हारे यौवन की
जिसमें मेरा मन डुबकियाँ ले रहा था
और मैं सराबोर हो रहा था
तुम्हारे सीने की छुवन भर से
मुझमे उठती थी इक सिहरन
तब
मैं तुझमें और तू मुझ में समा जाती थी
आज जबकि
तुम जाती हो मेरे आसपास
फिर भी सोच रहा हूँ, कल्पना कर रहा हूँ
कि
काश अगर तुम होती
तुम जाती हो मेरे आसपास
फिर भी सोच रहा हूँ, कल्पना कर रहा हूँ
कि
काश अगर तुम होती
तो आज
अपने दिल को तेरे दिल में समा देता।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'25' 10th May, 1999
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'25' 10th May, 1999
Friday, May 06, 2011
सलामत दोस्ती
मिले और मिलते रहो
दोस्ती तुम्हारी रहे सलामत हमेशा
याद करे वो तुम्हें इतना
कि
न कर पाओ याद तुम उसे इतना
वक़्त पर करना याद
जब कभी महसूस हो कमी मेरी
तो देना आवाज़ अपने इस प्यारे यार को,
जो बैठा है इस वक़्त अकेला,
बिल्कुल अकेला
नहीं है कोई मेरे साथ
है अगर साथ तो यादें,
सिर्फ तेरी यादें।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी'
'24' 9th May 1999
दोस्ती तुम्हारी रहे सलामत हमेशा
याद करे वो तुम्हें इतना
कि
न कर पाओ याद तुम उसे इतना
वक़्त पर करना याद
जब कभी महसूस हो कमी मेरी
तो देना आवाज़ अपने इस प्यारे यार को,
जो बैठा है इस वक़्त अकेला,
बिल्कुल अकेला
नहीं है कोई मेरे साथ
है अगर साथ तो यादें,
सिर्फ तेरी यादें।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी'
'24' 9th May 1999
आजकल
आजकल
सुस्ती से भरे दिन
आलस से भरी रातें
गुजरती हैं
क्योंकि
मौसम ही है ऐसा
भटकता है मन
बहकता है दिल
तलाश करता है कुछ
क्या, क्या ?
न जाने- न जाने क्या ?
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी"
'23' 9th May, 1999
सुस्ती से भरे दिन
आलस से भरी रातें
गुजरती हैं
क्योंकि
मौसम ही है ऐसा
भटकता है मन
बहकता है दिल
तलाश करता है कुछ
क्या, क्या ?
न जाने- न जाने क्या ?
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी"
'23' 9th May, 1999
Wednesday, May 04, 2011
मजबूरियां
अभी- अभी महसूस किया है मेरे दिल ने
जैसे की आवाज़ दी है तुमने
कहा है तुमने
आजा , आजा, सनम आजा
मगर मेरे सामने हैं कुछ मजबूरियां
जिस वजह से
मुझमें और तुझमें हैं दूरियां
इंतजार है बस उस दिन का
जबकि
हटेंगी ये मजबूरियां
और कम होंगी ये दूरियां
तब
मैं तुझमें और
तू मुझमें समां जाएगी।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'22' 9th May, 1999
जैसे की आवाज़ दी है तुमने
कहा है तुमने
आजा , आजा, सनम आजा
मगर मेरे सामने हैं कुछ मजबूरियां
जिस वजह से
मुझमें और तुझमें हैं दूरियां
इंतजार है बस उस दिन का
जबकि
हटेंगी ये मजबूरियां
और कम होंगी ये दूरियां
तब
मैं तुझमें और
तू मुझमें समां जाएगी।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'22' 9th May, 1999
Monday, May 02, 2011
तू ही बता दे
इस ओर नज़र आता है कैरियर
उस ओर खींचता है उसका प्यार
ऐसे हालातों में ठहरी हुई है मेरी मझधार
आता है जब तूफ़ान
सोचता है तब मेरा मन
जाएं किस ओर
इस ओर या उस ओर
हासिल करने हैं दोनों साहिल
मगर पायें पहले कौन सा साहिल
समंदर के बीचों- बीच खड़े होकर
आज सोच रहा हूँ मैं यही
पहले किस साहिल पर है जाना सही
बता दे आज तू ही बता दे !!!
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'21' 7th May, 1999
Sunday, May 01, 2011
तुम्हारा काम है
ये दिल तो अब अमानत है तेरी
इस पर लिखा बस तेरा नाम है
इसे चाहना , न चाहना
इसे हँसाना , रुलाना
अब तो तुम्हारा काम है
इसे सोचना, न सोचना
इसे देखना, न देखना
अब तो तुम्हारा काम है
रखो इसे दिल के करीब या मन के पास
अब तो ये तुम्हारा काम है
मुझे जो करना था मैंने कर दिया
तुझे जो निभाना था तूने निभा दिया
मेरा जो अपना था मैंने वो दे दिया
अब इसे संभालना तुम्हारा काम है
मेरे पास नहीं है अब कुछ
दे दिया मैंने सब कुछ
इसे मुहब्बत और प्यार करना
अब तो तुम्हारा काम है
इसे नहीं याद अब किसी का नाम है
इसके तो होठों पर सिर्फ तेरा नाम है
अब रही सही कारीगरी करना
तुम्हारा काम है, तुम्हारा काम है
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'20' 23rd Apr., 1999
इस पर लिखा बस तेरा नाम है
इसे चाहना , न चाहना
इसे हँसाना , रुलाना
अब तो तुम्हारा काम है
इसे सोचना, न सोचना
इसे देखना, न देखना
अब तो तुम्हारा काम है
रखो इसे दिल के करीब या मन के पास
अब तो ये तुम्हारा काम है
मुझे जो करना था मैंने कर दिया
तुझे जो निभाना था तूने निभा दिया
मेरा जो अपना था मैंने वो दे दिया
अब इसे संभालना तुम्हारा काम है
मेरे पास नहीं है अब कुछ
दे दिया मैंने सब कुछ
इसे मुहब्बत और प्यार करना
अब तो तुम्हारा काम है
इसे नहीं याद अब किसी का नाम है
इसके तो होठों पर सिर्फ तेरा नाम है
अब रही सही कारीगरी करना
तुम्हारा काम है, तुम्हारा काम है
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'20' 23rd Apr., 1999
Friday, April 29, 2011
खुशबू
ये दुनिया बदल गयी
ये नज़ारे बदल गए
बदल गया सारा ज़माना
पर मेरे दोस्त तुम न बदलना
तुम्हीं से है ख़ुशी तुम्हीं से है ग़म
तुमसे बिछड़कर ये ज़िन्दगी
ज़िन्दगी न रहेगी
हो जाएगी काले आसमां की तरह
जिसमें नहीं आता है कुछ और नज़र
सिवाए अँधेरा और कालेपन के
गर तुमने न दी जुदाई
और जीवन की राह पर पकड़ा मेरा हाथ
तो मैं हो जाऊंगा
उस फूल की तरह
जो अभी-अभी
कली से फूल बना है
जिसमें आ रही है इक खुशबू
जो दे रही है गवाही कि
तुम मुझमें हो, मुझमें ।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'19' 23rd Apr. 1999
ये नज़ारे बदल गए
बदल गया सारा ज़माना
पर मेरे दोस्त तुम न बदलना
तुम्हीं से है ख़ुशी तुम्हीं से है ग़म
तुमसे बिछड़कर ये ज़िन्दगी
ज़िन्दगी न रहेगी
हो जाएगी काले आसमां की तरह
जिसमें नहीं आता है कुछ और नज़र
सिवाए अँधेरा और कालेपन के
गर तुमने न दी जुदाई
और जीवन की राह पर पकड़ा मेरा हाथ
तो मैं हो जाऊंगा
उस फूल की तरह
जो अभी-अभी
कली से फूल बना है
जिसमें आ रही है इक खुशबू
जो दे रही है गवाही कि
तुम मुझमें हो, मुझमें ।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'19' 23rd Apr. 1999
Thursday, April 28, 2011
सपने
तेरा ये दिल है घर मेरा
नज़रें तेरी हैं मेरी निगाहें
जिनमें
सजाता हूँ मैं कुछ हसीं सपने
जो सच होंगे कभी अपने
इक हरा भरा आँगन होगा
बीच में होगा पानी
घर के ऊपर होंगे कुछ फूल
जिन्हें देखकर
मन लहलहाएगा
और दिल मचल जायेगा
कुछ देर बाद तुम रूठ जाओगी
और मैं मनाऊंगा
हँसना तुम्हारा होगा इशारा
रूठे से मन जाने का
फिर भर लोगी तुम मुझे अपनी बाहों में
और मैं तुझे अपनी बाहों में
देखेंगे फिर कुछ और
हसीं और हसीं सपने।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'18' 15th Apr, 1999
नज़रें तेरी हैं मेरी निगाहें
जिनमें
सजाता हूँ मैं कुछ हसीं सपने
जो सच होंगे कभी अपने
इक हरा भरा आँगन होगा
बीच में होगा पानी
घर के ऊपर होंगे कुछ फूल
जिन्हें देखकर
मन लहलहाएगा
और दिल मचल जायेगा
कुछ देर बाद तुम रूठ जाओगी
और मैं मनाऊंगा
हँसना तुम्हारा होगा इशारा
रूठे से मन जाने का
फिर भर लोगी तुम मुझे अपनी बाहों में
और मैं तुझे अपनी बाहों में
देखेंगे फिर कुछ और
हसीं और हसीं सपने।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'18' 15th Apr, 1999
Tuesday, April 26, 2011
करीब
ये ज़मीं ये आसमां
ये सितारे
मांगते हैं तुम्हें
क्योंकि
चाहते हैं हम तुम्हें
नज़र कहती है मेरे पास आओ
दिल कहता है मेरे करीब आओ
पर न जाओ तुम किसी के पास
आ जाओ बस मेरे और मेरे पास
नज़रें से नज़रें मिला लो
दिल से दिल को मिला लो
करें फिर कुछ प्यार की बातें
छोड़ कर दुनिया की बातें
याद करें अब वो रातें
जब होता था मेरा चेहरा
तुम्हारे इन हसीं हाथों में
और मैं खो जाता था वहां
नहीं पहुँच सकता कोई जहाँ
लेकिन
जल्दी करो इस दूरी को दूर
बिन तेरे गुजारी रातों को
कर दो अब चूर - चूर ।
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'17' 15th Apr. 1999
Thursday, April 21, 2011
यही है तमन्ना
चाहते हैं हम सिर्फ तुमको
और शायद तुम हमको
तुम्हें हो या न हो भरोसा
पर मुझे है पूरा भरोसा
कि
मेरे दिल में सिर्फ तुम हो
तेरे दिल में हम हों न हों
तुमसे मिलने पर ख़ुशी होती है ऐसी
डूबता को मिलने पर किनारा होती है जैसी
तुमसे जुदा होने पर हालत होती है ऐसी
समंदर से लहर जुदा होती है जैसी
टूट पड़ता है ग़म का अम्बार
छिन जाती है दामन से सारी ख़ुशी
जब कोई करता है बातें जुदाई
कि
कि
न बिछड़ना, न होना जुदा
यही है तमन्ना , यही है आरज़ू !!!!
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'16' 15th Apr. 1999
Monday, April 11, 2011
किताबें
जब कभी सोचता हूँ दुनिया के नजारों में
तो इनका हल ढूंढता हूँ अपनी किताबों में
नहीं आता मुझे जब कुछ याद
तो खो जाना चाहता हूँ अपनी किताबों में
उसे यहाँ खोजता हूँ वहाँ खोजता हूँ
लेकिन देखता हूँ उसे अपनी किताबों में
नहीं होता है जब कोई मेरे साथ
तो दिल को लगाता हूँ अपनी किताबों में
ईश्वर ने बनाया है इसे सोच समझकर
इसलिए इंसान मिल जाना चाहता है अपनी किताबों में
जब भी आता है मेरे ऊपर कोई ग़म
तो ख़ुशी तलाश करता हूँ अपनी किताबों में
- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
'15' 15th Apr. 1999
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