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Thursday, August 04, 2011

मेरे जांनिसार

आँखों का नशा
होठों से पिला दे
छीन ले मेरा होशो हवास
कर दे मुझको पागल
कि बस


आँखों में हो तेरा चेहरा
दिल में हो तेरी तस्वीर
हो जाये मेरी ऐसी तकदीर

हों तेरी भावनाएं मेरे मन में
और मेरी भावनाएं तेरे मन में
ऐसा हो इक नया अहसास
कर सकूँ जिसे जी भर के प्यार

न मिले मुझे राहों में इक भी फूल
मिले चाहे सारे खार
लेकिन तुम
ऐसा ही करना मेरे जांनिसार !!

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
13rd July, 1999, '45'

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