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Wednesday, August 03, 2011

फिर तुम न जाना कभी

तेरी जुल्फें संवार दूँ
तुझको निहार लूँ
पलकों पे बिठा के
दिल में सजा लूँ
फिर तुम जाना कभी
मुझसे दूर हो के !

गालों को छू के
होठों को चूम लूँ
तेरे चेहरे को हाथों में लेके
अपनी गोद में रख लूँ
फिर तुम जाना कभी
मुझसे दूर हो के !

आँखों को मिला के
जी भर के देख लूँ
अब करके थोड़ा प्यार
नशे में झूम लूँ
फिर तुम जाना कभी
मुझसे दूर हो के !

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"

1st July, 1999, '43'

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