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Monday, June 06, 2011

मैं बताऊँ कैसे

मैंने तेरी याद में कितने बहाए अश्क
उन अश्कों को गिनाऊं कैसे

मैं तुम्हें करता हूँ याद कैसे
वो अदा मैं तुम्हें बताऊँ कैसे

दूर तुमसे रह के दिन बिताता हूँ कैसे
ये तुम्हें समझाऊं कैसे

कब तुमसे करता हूँ मैं प्यार
वो वक़्त मैं बताऊँ कैसे

जुदाई मैं जब करता है मेरा दिल तुम्हें याद
वो दिल की थकन मैं बताऊँ कैसे

तुम्हें चाहता हूँ देखना किस रूप में
वो रूप मैं बताऊँ कैसे

मेरा मन तुमसे मिलने को कर रहा है कितना
इस बात को तुम तक मैं पहुंचाऊं कैसे

जब भी देखता हूँ मैं चाँद में तुम्हें
वो चाँद की मुस्कराहट मैं बताऊँ कैसे

दिल के करीब हो के, फिर भी तुमसे दूर
आज "अजनबी' को मैं बताऊँ कैसे

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"

5th June, 1999, '39'

1 comment:

  1. खुबसूरत ग़ज़ल ......

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