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Monday, June 28, 2010

दिल, दर्द अहसास

इज्ज़त बढाकर खुद मुझको सरेआम करते हो
क्यूँ इस बदनाम को और बदनाम करते हो

आजकल अँधेरे में गुजर रही है ज़िन्दगी अपनी
चन्द शुआयें बची हैं उन्हें भी शाम करते हो

दिल, दर्द, अहसासों से बड़ा रिश्ता रहा अपना
आज भरी महफ़िल में उन्हें क्यूँ नीलम करते हो

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी'
28th Sep. 05, '270'

Friday, June 18, 2010

समर्पण

तुम्हें क्या करूँ अर्पित
और क्या न करूँ समर्पित
जब हर सुबह, हर शाम
तुम्हारा है।

ये साँसों का बहकना, दिल का मचलना
तुम्हारा है।

मेरे पास रह ही क्या गया है
सिवाए उसके
मेरे पास नहीं है कुछ, उसके पास है सब कुछ
क्योंकि
जो नहीं है मेरे पास
वो है उसका खास
मेरी आशा है ऐसी
कि

मुझे प् के वो, प् लेगी
दुनिया कि सारी ख़ुशी
लेकिन जब मैं गौर करता हूँ, एक नज़र
अपने दिल के ऊपर
तो अहसास होता है
कि
मेरे पास ये कमसिन दिल
और ये पागल मन अब भी है
अब बता दे तू ही
कि
मैं तुझे क्या भेंट करूँ
क्या न करूँ?

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी" कोंचवी

14th Jan, 1999, '6'

इंतजार

था जिस घड़ी का इंतजार
लो वो घड़ी आ गयी
मगर साथ में कुछ पानी की बूँदें लाई
ये पानी की बूँदें नहीं , ये तो ख़ुशी के आंसू हैं
ख़ुशी इसी बात की, कि इनमें कुछ ग़म के आंसू हैं

ये आंसू सुना रहे हैं दर्दे मुहब्बत उसकी
जो घिरी हुई है मजबूरियों जैसे पहाड़ों से
मुश्किल है निकलना उसका इन दीवारों से

मगर मैंने कह रखा है उससे
यही तो लड़ना है ज़िन्दगी से
मुझे विश्वास ही नहीं पूरा भरोसा है
कि वो मेरा साथ निभाएगी

जब तक कि मैं रहूँगा इस दुनियां में "अजनबी' बनकर
वो मेरा साथ देगी निशा बनकर

मेरे लिए बग़ावत करेगी वो दुनिया से
लड़ेगी, संघर्ष करेगी और पा लेगी मुझे

ईश्वर करे आसां हों ये काँटों के रस्ते
नव वर्ष पर यही दुआ है 'उसके' लिए!!!

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी"अजनबी' कोंचवी
1st Jan , 1999, '5'

Thursday, June 17, 2010

नमन

मेरे प्रिये मित्र नमन
रहे तुम्हारे पास हमेशा अमन
करते हैं तुमसे कई आशाएं
मेरे दिल में तुम्हारे लिए हैं कई भावनाएं

उनमें से एक
लक्ष्य है तुम्हारा जो
याद रहे हमेशा वो
क्योंकि
जीवन के इस चक्र में
कई गर्त हैं
तुम्हें गर्त नहीं
अपनी मंजिल को देखना है

पर मेरे यार इन सब भंवर में
न भूल जाना अपने
इस साथी को
जो साथ है तुम्हारे तब से
जबकि
शायद हम दोनों ने जीने का
सलीका सीखा था

बर्थडे पर तुम्हारे
साहित्य से हमारे
अर्पित हैं दो पंक्तियाँ
जो सामने हैं तुम्हारे!!!

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी" कोंचवी

23rd, Jan 1999, '4'

लानत

लानत है ऐसी ज़िन्दगी पर
जो हो न सका फ़िदा इस देश पर
मौका मिला सुहावना
जाँ देने का इस देश पर
जो हो न सका कुर्बां इस देश पर

मौका निकल गया
हाथ उसका खाली समझकर
उसने भी भुला दिया
उसे सपना समझकर

गर हो जाता वो
शहीद इस देश पर
याद किया जाता उसे उनमें
जिन्होंने सींचा है इसे अपने
लहू और पसीने से

याद आती है जब उनकी
तो ये आँख हो आती है नाम
मन में उनकी
आकृतियों को देखकर
शायद दुर्भाग्य था उसका
किसी तरह बदल गया था मस्तिष्क उसका!!!

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी"अजनबी"

23rd Apr, 1999, '3'

मुल्क

ये प्यारा प्यारा मुल्क हमारा
हमको है ये सबसे प्यारा

जो खींच रहा है बार बार
मुझे अपनी ओर!

सच तो ये है की इसमें
ऐसे ऐसे हैं नज़ारे
जिनकी तारीफ करना
मेरे बस से है बाहर

इसके लहलहाते खेत
उसमें सरसों के फूल

मन को भा जाते हैं ऐसे
कि दिल करता है
इन्हें और बस इन्हें देखो

इसमें बसने वाली वो नारी
जिसके हाथों में कंगन
और माथे पर बिंदिया
यही होती है उसकी निंदिया
i.e. this is my India !!

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"
23rd , Apr. 1999 '2'

इस जहाँ को बनाने वाला

ओ इस जहाँ को बनाने वाले
तुझे भेज रहा हूँ आज में सलाम!
दिली तमन्ना है मेरी
कि कर लेना इसे कुबूल
बनाई हैं तूने ऐसी ऐसी चीजें

देखता हूँ तो देखता ही रहता हूँ
सोचने पर मजबूर हो जाता है मन
इसी में खो जाना चाहता है मन
क्या आसमां है क्या जमीं है
कहीं पहाड़ हैं तो कहीं नदी है

अक्सर मैं सोचता हूँ
कितने अहसान फरामोश हैं यहाँ के लोग
जो जरा भी नहीं सोचते उसके बारे में
कहते हैं ये और
नहीं है कोई जो रास्ता दिखा रहा
है इस दुनिया को
ओ साडी प्रकृति को सँवारने वाले
नहीं आ रहा है समझ में मेरी
कैसे करूँ मैं तारीफ तेरी।

- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"

23rd Apr. 1999 '1'

Saturday, May 08, 2010

प्यार

"ये प्यार भी क्या चीज़ है यार , तड़पना आहें भरना, रोना और थोडा सा मुस्कराना, आँखों में आंसूं, दिल में मलाल , मन में मिलन की आशा , अर्थात चैन से ज़िन्दगी न जी पाने का नाम है 'प्यार" है।
-"Ajnabi"

" यही जीवन है"

I am M. S. M. To see me with Love and pity not hate, because I am very soft!

"यही जीवन है"

........Dedicated to a sweet pain of my heart!
- "Ajnabi"

" प्यार वो है जो हर किसी को नहीं मिलता"

" बड़ा खुशनसीब है वो जिसे तेरे आँचल का साथ मिला"

"मैं तेरा आइना हूँ और तुम मेरा आइना हो"

"प्यार अनजाने में होता है"
-" अजनबी"

"Literature In My View"

"साहित्य " इस शब्द को आँखों से देखते ही मन में कुछ होता है। कल्पनाएँ जाग जाती हैं। मन प्रकृति में खो जाता है और दिल में खुशी और गम दोनों के मंजर पैदा हो जाते हैं। होठों पर कभी हँसी आती है तो कभी मलाल । पर जब होठों पर हँसी आती है तो होंठ थिरकने लगते हैं , कुछ कहना चाहते हैं लेकिन ....... और जब होठों पर मलाल का मौसम छाता है तो होंठ बिल्कुल रुके हुए , न यहाँ , न वहां , कहीं भी हिलना नहीं चाहते। मन भटकने लगता है। कभी नदी तो कभी झील को देखता है और पानी की धार को एक तक देखता रहता है । उसमें तैरना चाहता है उसमें जाना चाहता है, उसमें मिलकर रहना चाहता है।


लोग कहते हैं तभी कुछ लिखा जा सकता है जब कोई किसी को चाहता हो , उसे प्यार करता हो ,उसे अपना बनाना चाहता हो । मेरे अनुसार ऐसी कोई बात नहीं है। ये तो मन में उठे विचार हें कुछ कल्पनाएँ हैं जो कुछ कह रहे हैं । जीवन का रास्ता बता रहे हैं। ये तुम्हें तुम्हारी मंजिल तक पुन्ह्चाना चाहते हैं। जहाँ तुम अपना सारा जीवन सारी दुनिया से अलग , इस जहाँ के लोगों की ज़िन्दगी बिताने के तरीके से हटकर , बिता सको। जहाँ तुम्हें चैन और सुकून मिले।
साहित्य में वो अनूठी चीज है की जब तुम्हारा दिल रोना चाहे तो इसे पढ़कर रोए और जब हँसना चाहे तो हँसे।
यही तो वो चीज है जो मनुष्य को आने वाले कल को पहले से महसूस करा देती है। मैंने इसे कैसे लिखना सीखा ये तो बता पाना बहुत मुश्किल है पर मैं इतना जरुर जानता हूँ की मन ने सोचा, दिल ने चाहा और कलम ने इस कीमती कागज़ पर लिख दिया।
अंत में, मैं यही कहूँगा की इसमें मैंने चैन सुकून और एक अजीब सी छुवन जो कुछ याद दिलाती है , पाया।


" नहीं है कुछ इस दुन्याए फानी में

बेकार है जीवन नहीं काम की ये ज़िन्दगी

जो है सब पल भर के लिए "

-Author

Mohd. Shahid Mansoori "Ajnabi"


- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी" कोंचवी

- 23rd Apr. 1999

"Introduction"

पूरा नाम- मुहम्मद शाहिद मंसूरी "अजनबी"

जन्म- 27 सितम्बर 1981 (कोंच)

यादगार दिन - जिस दिन मैंने पहली कविता लिखी

मनपसंद खेल - क्रिकेट

मनपसंद खिलाडी- मुहम्मद अजहरुद्दीन , शाहिद आफरीदी

किससे नफरत है- भीड़ और लोग लड़कियों को गिरी हुई नज़र से देखते हैं।

सबसे कीमती धरोहर- ईमानदारी

मनपसंद भोजन- दाल- चावल

मनपसंद पेय- Sprite

ज़िन्दगी में सिद्धांत- ज़िन्दगी का मज़ा लो, जो मन हो वह पूरा करो, नफरत को नफरत से नहीं बल्कि प्यार और नम्रता से ख़त्म किया जा सकता है।

मनपसंद Female जेवर - सिर्फ कंगन

मनपसंद फिल्म- दिलवाले दुल्हनियां ले जायेंगे, कुछ - कुछ होता है , हम दिल दे चुके सनम

मनपसंद अभिनेता- आमिर खान

मनपसंद अभिनेत्री- काजोल

Friday, May 07, 2010

First Page

"Dedicated to the
memory of my
grand parents
and the special
person who live
in my heart"

- Muhammad Shahid Mansoori "Ajnabi" Konchvi.